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मांसाहारी भोजन मुसलमानों को हिंसक बनाता है
   

प्रश्न : विज्ञान से पता चलता है कि इंसान जो कुछ खाता है उसका प्रभाव इंसान के व्यवहार पर पड़ता है। फिर क्यों इस्लाम मुसलमानों को मांसाहारी भोजन खाने की इजाज़त देता है? जानवरों का मांस खाने से मनुष्य हिंसक और निर्दयी बन सकता है।
उत्तर :
1. केवल शाकाहारी जानवरों का मांस खाने की इजाज़त है
यह सही है कि आदमी जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसके व्यवहार पर पड़ता है। यह भी एक कारण है जिसकी वजह से इस्लाम मांसाहारी जानवरों जैसे-शेर, बाघ, चीता आदि हिंसक पशुओं के मांस खाने को हराम (निषेध) ठहराता है। ऐसे जानवरों के मांस का सेवन व्यक्ति को हिंसक और निर्दयी बना सकता है। इस्लाम केवल शाकाहारी जानवर जैसे-भैंस, बकरी, भेड़ आदि शांतिप्रिय पशु और सीधे-साधे जानवरों के गोश्त खाने की अनुमति देता है।
2. कु़रआन कहता है कि पैग़म्बर बुरी चीज़ों से रोकते हैं
पवित्र क़ुरआन में है-
‘‘......पैग़म्बर उन्हें भलाई का हुक्म देता और बुराई से रोकता है।’’ 
(क़ुरआन, 7:157)
अर्थात् पैग़म्बर लोगों के लिए उन चीज़ों को जायज़ ठहराता है जो अच्छी और पवित्र हैं तथा उन चीज़ों से रोकता है जो बुरी और अपवित्र हैं।
‘‘रसूल जो कुछ तुम्हें दे उसे ले लो और जिस चीज़ से तुम्हें रोक दे उससे रुक जाओ, और अल्लाह का डर रखो।’’ (क़ुरआन, 59:7)
पैग़म्बर के फ़रमान एक मुसलमान को संतुष्ट करने के लिए काफ़ी हैं कि ख़ुदा नहीं चाहता कि इंसान हर प्रकार का मांस खाए। उसने इसलिए सिर्फ़ कुछ जानवरों के मांस खाने की इजाज़त दी है।
3. पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) ने मांसाहारी जानवरों को खाने से मना किया है
मांसाहारी जानवरों से संबंधित ‘सहीह बुख़ारी’ और ‘सहीह मुस्लिम’ नामक हदीस-ग्रंथों में वर्णित हदीसों में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) ने निम्नलिखित जानवरों के मांस खाने से मना किया है—
(क) नुकीले दाँत वाले जंगली जानवर अर्थात् मांसाहारी जानवर जैसे-बाघ, शेर, चीता, भेडि़या, कुत्ता आदि।
(ख) कुछ विशेष कुतरने वाले जानवर, जैसे-चूहा, पंजे वाले ख़रगोश आदि।
(ग) नुकीली चोंच वाले और पँजे से शिकार करने वाले पक्षी जैसे-गिद्ध, चील, कौआ, उल्लू इत्यादि।
(घ) कुछ रेंगने वाले जानवर जैसे-साँप, मगरमच्छ आदि।
 


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