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पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰)
हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) और भारतीय धर्म-ग्रंथ

सत्य हमेशा स्पष्ट होता है। उसके लिए किसी तरह की दलील की ज़रूरत नहीं होती। यह बात और है कि हम उसे न समझ पाएं या कुछ लोग हमें इससे दूर रखने का कुप्रयास करें। अब यह बात छिपी नहीं रही कि वेदों, उपनिषदों और पुराणों में इस सृष्टि के अंतिम पैग़म्बर (संदेष्टा) हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आगमन की भविष्यवाणियां की गई हैं। मानवतावादी सत्यगवेषी विद्वानों ने ऐसे अकाट्य प्रमाण पेश कर दिए, जिससे सत्य खुलकर सामने आ गया है।


अन्तिम ऋषि

इन्सान को ज़िन्दगी जीने के लिए जिस ज्ञान और मालूमात की ज़रूरत होती है, उसमें से काफ़ी हिस्सा उसकी पंचेन्द्रियों [Five Senses–देखना (आंख), सुनना (कान), सूंघना (नाक), चखना (जीभ), छूना (हाथ), के माध्यम से उसे हासिल होता है।


सब के लिए साक्षात् आदर्श

मानव-जीवन को कल्याण और भलाई के मार्ग पर डालने के लिए एक आदर्श चाहिए। आदर्श वास्तव में मापदंड (Standard) का काम करता है, जिस पर नाप-तौलकर यह पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति के व्यवहार का कितना भाग खरा है और कितना खोटा। मापदंड या आदर्श काल्पनिक भी होते हैं, जो क़िस्से-कहानी के रूप में उपदेशों में बयान किए जाते हैं और सुनकर लोग ख़ुश होते हैं। लेकिन उसका कोई वास्तविक लाभ व्यक्तिगत या सामाजिक जीवन में नहीं होता।


हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) विश्व नेता

किसी व्यक्ति को विश्व-नेता कहने के लिए कुछ मानदंड निर्धारित होने चाहिएँ और फिर उस व्यकित का, उन मानदंडों पर आकलन कर के देखना चाहिए कि वह उन पर पूरा उतरता है या नहीं।


हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) : प्रसिद्धतम व्यक्तित्व

‘‘यदि उद्देश्य की महानता, साधनों का अभाव और शानदार परिणाम—मानवीय बुद्धिमत्ता और विवेक की तीन कसौटियाँ हैं, तो आधुनिक इतिहास में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के मुक़ाबले में कौन आ सकेगा?


मुहम्मद (सल्ल॰) : ईशदूत

पैग़म्बर मुहम्मद की शिक्षाओं का ही यह व्यावहारिक गुण है, जिसने वैज्ञानिक प्रवृत्ति को जन्म दिया।


विश्वसनीय व्यक्तित्व (अल-अमीन)

इस्लाम का राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्था से सीधा संबंध नहीं है, बल्कि यह संबंध अप्रत्यक्ष रूप में है और जहां तक राजनैतिक और आर्थिक मामले इन्सान के आचार-व्यवहार को प्रभावित करते हैं,


हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) : महानतम क्षमादाता

‘‘जो अपने क्रोध पर क़ाबू रखते हैं......।’’ (क़ुरआन, 3:134)


इस्लाम के पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰)

मुहम्मद (सल्ल॰) का जन्म अरब के रेगिस्तान में मुस्लिम इतिहासकारों के अनुसार 20 अप्रैल, सन् 571 ई॰ हुआ।


पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) की शिक्षाओं के प्रभाव

हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) की शिक्षाओं के प्रभाव अगण्य और अनंत हैं, जो मानव स्वभाव, मानव-चरित्र, मानव समाज और मानव सभ्यता-संस्कृति पर पड़े।


हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰)

इस्लाम के पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰), अत्यंत लम्बी ईशदूत-श्रृंखला में एकमात्र ईशदूत हैं जिनका पूरा जीवन इतिहास की पूरी रोशनी में बीता। इस पहलू से भी आप उत्कृष्ट हैं


हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के जीवन-आचरण का सन्देश

प्रस्तुत विषय पर अगर तार्किक क्रम के साथ लिखा जाए, तो सबसे पहले हमारे सामने यह सवाल आता है कि एक नबी के जीवन-आचरण का ही सन्देह क्यों? किसी और का सन्देश क्यों नहीं?





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